संजय दत्त ने बताया साउथ इंडस्ट्री के आगे क्यूँ नही टिक पाती बॉलीवुड की फ़िल्में !

KGF चैप्टर 2  ने आते ही गदर काट दिया। रिलीज से पहले उसने एडवांस टिकट बुकिंग से तो आधी कमाई कर ली थी। और अब उसने बॉस्क ऑफिस पर ‘बाहुबली’ तक का रेकॉर्ड तोड़ दिया है। फिल्म में पहले चैप्टर के आगे की कहानी दिखाई गई है। जिन कैरेक्टर्स का जिक्र पहले पार्ट में  करके छोड़ दिया गया था, उनको चैप्टर 2 में स्क्रीन पर बखूबी दर्शाया गया है। इसमें हालांकि दो किरदार अहम हैं। एक तो प्रधानमंत्री रमिका सेन का और दूसरा गरुड़ा के भाई अधीरा  का। अब जब ये दोनों यश के साथ स्क्रीन शेयर करते दिखाई दिए तो लोगों की खुशी के मारे चीख तक निकल गई। देखा जाए तो पिछले कुछ समय से साउथ की फिल्में बॉलिवुड पर भारी पड़ रही हैं।

संजय दत्त को कैसे मिला KGF में अधीरा का किरदार

sanjay dutt on bollywood and south industry: kgf chapter 2 fame adheera aka sanjay  dutt reveals why south films is more better than bollywood movie- साउथ के  सामने क्यों नहीं टिक पाती

बातचीत में संजय दत्त से पूछा गया कि वह KGF चैप्टर 2 से कैसे जुड़े, तो ऐक्टर ने कहा,  में अधीरा का सिर्फ एक हेड शॉट था, वह एक परछाईं  से शूट कर लिया गया था। फिर दूसरे चैप्टर के लिए मेकर्स ने मुझे लेने के लिए फैमिली फ्रेंड से संपर्क किया। उस दोस्त ने मेरी पत्नी से कॉन्टैक्ट किया। मेरी पत्नी ने पहले स्क्रिप्ट देखी फिर उसने मुझे बताया कि कैरेक्टर बहुत इंट्रेस्टिंग है और मुझे ये करना चाहिए। फिर मैंने भी पहला चैप्टर देखा और मुझे भी बहुत पसंद आया।

संजय दत्त ने बताया बॉलिवुड से क्यों बेहतर है टॉलिवुड

sanjay dutt: KGF 2 stars Yash and Sanjay Dutt during their film's promotion  in Delhi: It's not Bollywood vs regional film industry, it is the Indian  film industry | Hindi Movie News -

संजय दत्त से आगे साउथ इंडस्ट्री की फिल्मों का बॉक्स ऑफिस पर धमाल करने के पीछे की वजह पूछी गई। ऐक्टर ने कहा, ‘मेरे ख्याल से हिंदी फिल्म इंडस्ट्री हीरोइज्म को भूल गई है, जबकि साउथ इंडस्ट्रीज नहीं भूली। मैं ये नहीं कर रहा हूं कि स्लाइस ऑफ लाइफ फिल्म या फिर रॉम- कॉम खराब है। लेकिन वह हमारी उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, राजस्थान की ऑडियंस को भूल गए हैं। जो हमारी बड़ी ऑडियंस का एक हिस्सा है। मैं आशा करता हूं कि ये ट्रेंड हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में जल्द वापस आए। पहले हमारे पास अलग-अलग निर्माता और फाइनेंसर थे जिन्हें फिल्म स्टूडियो के कॉर्पोराइजेशन ने खत्म कर दिया है। कॉरपोरेटाइजेशन अच्छा है लेकिन इससे हमारी फिल्मों के टेस्ट में बाधा नहीं आनी चाहिए।’

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