पिता के गुजरने के बाद कैसे पाला कपिल देव और उनके 6 अन्य भाई बहेनो को मां राजकुमारी निखंज।

आज भारतीय क्रिकेट टीम दुनिया की सबसे बेहतरीन टीमों में मानी जाती है मगर हमेशा से ही भारतीय क्रिकेट टीम दुनिया की सबसे बेहतरीन टीम नहीं मानी जाती थी इस को बेहतरीन बनाने के लिए हमारे भारतीय क्रिकेटरों ने अपनी जान और खून पसीने की मेहनत से इस टीम को आज इसकी नई ऊंचाइयों और बुलंदियों तक पहुंचाया है और अगर इसका सबसे ज्यादा श्रेय किसी को चाहता है तो वह है कपिल देव जिनकी कैप्टंसी में भारत ने सबसे पहला अपना वर्ल्ड कप जीता आज इस आर्टिकल में हम आपको कपिल देव की कहानी ही बताने जा रहे हैं।

कैसे पाला कपिल देश की महान है कपिल देव और उनके अन्य छह भाई-बहनों को पिता के गुजरने के बाद।

उनकी माँ, राज कुमारी निखंज ने अकेले ही कपिल और उनके 6 भाई-बहनों को पाल-पोसकर बड़ा किया.यह उनकी माँ ही थीं, जो क्रिकेट करियर के शुरुआती दिनों में उनकी मार्गदर्शक बनीं और जिस समय में खेल-कूद को समय की बर्बादी और पढ़ाई-लिखाई को ही सब कुछ माना जाता था, उस समय उन्होंने कपिल को बढ़ावा दिया। कपिल देव का पूरा नाम कपिलदेव रामलाल निखंज.इनका जन्म 6 जनवरी 1959 को चंडीगढ़ में हुआ था.कपिल के पिता का नाम पिता रामलाल निखंज और माता का नाम माता राजकुमारी लाजवंती हैं.कपिल की पत्नी रोमी भाटिया हैं.चंडीगढ़ में जन्मे कपिल देव ने बचपन में ही अपने पिता को खो दिया था।

कपिल देव ने अपने करियर की शुरुआत प्रथम श्रेणी के क्रिकेट से करी थी 1975 में मात्र 3 सालों में ही कपिल देव का सिलेक्शन भारतीय क्रिकेट टीम के लिए हो गया था 1978 में और कपिल देव सचिन तेंदुलकर से भी पहले बन गए थे सबसे कम उम्र में भारतीय क्रिकेट टीम के खिलाड़ी।

कपिल का चयन तो टीम इंडिया में हो चुका था लेकिन वे सुर्खियों में तब आए जब साल 1979 में उन्होंने वेस्टइंडीज के खिलाफ 126 रनों की नाटआउट पारी खेली। राजधानी दिल्ली में खेली गई इस पारी के बाद कपिल सबकी नजरों में आ गए। कपिल ने भारतीय टीम में इंट्री मध्यम तेज गेंदबाज के रूप में की थी.लेकिन जल्द ही उन्होंने अपने बल्लेबाजी का कौशल दिखाते हुए बतौर हरफरमौला की छवि बना ली। कपिल के आने के बाद भारतीय क्रिकेट टीम में मध्यम तीव्र गति के गेंदबाजों की कमी काफी हद तक दूर हो गई।

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