उत्तराखंड के नसीम ने तराशा है टोक्यो ओलंपिक में इतिहास रचने वाले नीरज को, परिवार है खेल समर्पित

टोक्यो ओलंपिक में देश के खिलाडियों ने दुनिया भर में भारत का नाम रोशन किया अपनी शानदार प्रदर्शन से न खुद कामयाबी हासिल की बल्कि देश के लिए भी इतिहास रच दिया। ओलंपिक में 121 साल बाद देश के लिए एथलेटिक्स का गोल्ड जीतकर इतिहास रच दिया। जिस नीरज ने गोल्ड जीतकर देश को बड़ी उपलब्धि दिलाई है उसे किसी और ने नहीं बल्कि रुड़की के नसीम अहमद के हाथों तराशा गया है। रुड़की के टोडा कल्याणपुर निवासी नसीम अहमद ही वह कोच हैं, जिन्होंने नीरज चोपड़ा को वर्ष 2011 से अब तक अपनी पाठशाला में जेवलिन की बारीकियां सिखाईं।

बता दें कि नसीम अहमद पंचकुला के रेजीडेंसियल हॉस्टल में कोच रह चुके है। इस दौरान उन्होंने 14 खिलाड़ियों को गुर सिखाए है। इन 14 में नीरज चोपड़ा भी शामिल है। वर्ष 2011 में पानीपत से नीरज उनके पास आए थे। इनमें से नीरज के अलावा पांच इंटरनेशनल खिलाड़ी बने, जो आज भी बड़े पदों पर हैं, लेकिन इसी दौर में नीरज काफी आगे बढ़ते गए। उन्होंने सबसे पहले अंडर-18 में रिकॉर्ड बनाया। फिर अंडर-20 में पोलैंड में 2016 में वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाकर एशियन ट्रैक फील्ड में गोल्ड मेडल झटका। फाइनल से पहले भी नीरज ने अपने कोच से बात की थी।

आपको बता दें कि नसीम अहमद का पूरा परिवार ही खेल को समर्पित है। हिंदू परिवार से ताल्लुक रखने वाली उनकी पत्नी वीना देवी पंचकुला के सरकारी स्कूल में स्पोर्ट्स टीचर हैं जबकि नेशनल चैंपियनशिप में मेडल हासिल करने वाली उनकी बेटी स्वप्निल अहमद वर्तमान में कनाडा में स्पोर्ट्स मैनेजमेंट में कोच हैं। नसीम की बेटी को इंजरी नहीं होती तो वह भी ओलंपिक में होती।

 

 

 

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