कैलास मानसरोवर यात्रा होगी सुलभ, अब कम समय में बेहतरीन सुविधाओं के साथ पहुंच सकेगे भोले के दरबार

देवो की भूमि उत्तराखंड में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए खुशखबरी है। चारधाम यात्रा के आसान होने के साथ ही अब कैलास मानसरोवर यात्रा भी आसान और आनंददायक होने वाली है। अब आपको केलास यात्रा के दौरान कई सुविधाओं का लाभ मिलने वाला है। इस पर काम शुरू हो गया है। अब आपकी यात्रा न केवल सुगम होगी, बल्कि आप यात्रा के दौरान आकर्षक बगीचों के बीच, खूबसूरत नदी घाटी क्षेत्रों को निहारते हुए पहाड़ी भोजन के आनंद लेते हुए  भोले के दरबार पहुंच सकेंगे।

आपको बता दें कि लोग सदियों से कैलास मानसरोवर का दौरा कर रहे हैं। उत्तराखंड के लगभग सभी प्रमुख मार्ग कैलास-मानसरोवर तक पहुंच जाते हैं। भारत-चीनी सीमा विवाद की वजह से, भारतीयों को लगभग दो दशकों तक कैलास-मानसरोवर पर जाने की अनुमति नहीं थी। हालांकि, 1981 से, भारतीय विदेश मंत्रालय के तत्वावधान में और चीनी सरकार के सहयोग से, कुमाँ मंडल विकास निगम ने लिपुलख पास के माध्यम से कैलाश-मानसरोवर के दौरे का आयोजन किया जा रहा है। अब ये यात्रा और सुलभ होने वाली है। जिसका आधार चीन सीमा तक बनी सड़क इसका आधार बनेगी।

धारचूला से अंतिम भारतीय सीमा नाभीढांग तक बनी सड़क में दो दर्जन से अधिक डंपिंग जोन बनाए गए हैं। व्यास घाटी क्षेत्र में बने इन डंपिंग जोन में छोटे-छोटे गार्डन बनाए जाएंगे। उच्च हिमालय में होने वाले विशेष फूल ब्रहम कमल, गुलाब के साथ ही ट्यूलिप के फूल इनकी शोभा बनेंगे। गार्डन में पहाड़ के परंपरागत शिल्प से सुसज्जित लकड़ी और घास के बने छोटे-छोटे रेस्टोरेंट कैलास मानसरोवर यात्रियों को इस लंबी यात्रा में तरोताजा बनाए रखेंगे। गार्डनों में उच्च हिमालय की औषधीय महत्व की जड़ी बूटी भी लगाई जाएंगी। इससे उनकी आजीविका बढ़ेगी।यात्रियों को बेहतर सुविधाओं के साथ ही यह सड़क स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी देगी।

 

 

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