उत्तराखंड में हैरानी वाले आंकड़े, बाल लिंगानुपात में सबसे पिछड़ा राज्य हुआ साबित - Shubh Network

उत्तराखंड में हैरानी वाले आंकड़े, बाल लिंगानुपात में सबसे पिछड़ा राज्य हुआ साबित

देहरादूनः उत्तराखंड में नीति आयोग के द्वारा जारी किए गए आंकड़े बेहद परेशानी वाले साबित हो रहे है। पांच साल पहले चेताने के बाद भी उत्तराखंड सरकार नहीं संभली और लिंग अनुपात के मामले में सबसे पिछड़ा राज्य साबित हो गया। एसडीजी के आंकड़ों के हिसाब से बालक बालिका लिंग अनुपात के मामले में उत्तराखंड में केवल 840 का औसत है, यानी राज्य में प्रति 1000 बालकों पर सिर्फ़ 840 बालिकाएं जन्मती हैं। हैरत और दुख की बात यह है कि 2021 में ऐसे आंकड़े होंगे, यह अनुमान विशेषज्ञों ने पांच साल पहले ही लगा लिया था!

बता दें कि नीति आयोग ने हाल में, सस्टेनेबेल डेवलपमेंट गोल्स (SDG) को लेकर जो डेटा जारी किया, उसके उनके मुताबिक शिशु जन्म के समय बाल लिंगानुपात के सबसे बेहतर आंकड़े छत्तीसगढ़ में दिखाई दिए, जहां यह अनुपात 1000:958 रहा. साफ तौर पर यह राष्ट्रीय औसत से कहीं ज़्यादा है. 957 के अनुपात के साथ केरल इस लिस्ट में दूसरे नंबर पर रहा. यही नहीं, पंजाब में 890 और हरियाणा में 843 का औसत चिंताजनक ज़रूर है, लेकिन पहले कम सेक्स रेशो के शिकार इन राज्यों के आंकड़े इस बार बेहतर दिखे. लेकिन इस मामले में सबसे पिछड़े राज्य के तौर पर उत्तराखंड ने अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई है।

गौरतलब है कि रजिस्ट्रार जनरल और भारत के जनगणना कमिश्नर ने पांच साल पहले ही सरकार को आगाह कर दिया था। 2016 में रिपोर्ट्स में कहा गया था कि उत्तराखंड में बच्चों का सेक्स रेशो में 2021 में 800 के आसपास पहुंच जाएगा. यह साफ तौर पर एक चेतावनी थी, लेकिन उत्तराखंड ने इस दिशा में गंभीर प्रयास करने में चूक ​की। जिस कारण राज्य आज सबसे पिछड़ गया है। डबल इंजन  सरकार में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान शुन्य साबित हुआ ।

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