हम बच्चों को कम्प्यूटर से बेहतर बनाने की कोशिश करते हैं पर बच्चे कभी कम्प्यू - Shubh Network

हम बच्चों को कम्प्यूटर से बेहतर बनाने की कोशिश करते हैं पर बच्चे कभी कम्प्यू

खेल बच्चों के जीवन का अहम हिस्सा हैं। यह सिर्फ मनोरंजन के लिए ही नहीं बल्कि उनके मानसिक और शारीरिक विकास के लिए भी जरूरी है। बदलते समय के साथ खेल के मायने भी बदल गए हैं।पहले मैदान, गलियां और आंगन बच्चों के खेलने की जगह थे, लेकिन नई जीवन शैली में जैसे-जैसे घरों ने फ्लैटों का रूप लिया और आंगन बालकनियों में बदल गए, वैसे-वैसे बच्चों के खेलने का तरीका भी बदल गया।

बदलती लाइफस्टाइल का असर

मेट्रो की भाग-दौड़ भरी जिंदगी में न तो परिवार के पास बच्चों को बाहर निकालने का समय है और न ही ऐसा माहौल जिसमें वे खुले मैदान में खेल सकें।फील्ड गेम्स की जगह कंप्यूटर, मोबाइल और वीडियो गेम्स ने ले ली है… लेकिन आज भी कई बच्चे आउटडोर गेम्स को जिंदा रख रहे हैं। ऐसा नहीं है कि बच्चों के लिए इंडोर गेम जरूरी नहीं है लेकिन घर में पूरा समय खेलना स्वास्थ्य और मानसिक विकास दोनों के लिए खतरा बन जाता है।

एप्पल के बड़े निवेशकों ने जताई चिंता

मशहूर गैजेट कंपनी एपल में करीब 1,200 करोड़ रुपये की हिस्सेदारी वाले दो बड़े निवेशकों ने बच्चों में गैजेट्स के बढ़ते खतरे पर चिंता जताते हुए एपल को एक पत्र लिखा था और एपल से इस समस्या से निपटने को कहा था।Apple को ऐसे सॉफ़्टवेयर विकसित करने के लिए कहा गया है जो माता-पिता को अपने मोबाइल फोन पर अपने बच्चों के व्यवहार की निगरानी करने की अनुमति देता है और वे इसका उपयोग कितने समय से कर रहे हैं।

एडेलमैन इंटेलिजेंस की शोध में बड़ा खुलासा

अंतरराष्ट्रीय शोध संस्थान एडेलमैन इंटेलिजेंस द्वारा 10 देशों में 12 हजार 710 माता-पिता पर किए गए शोध में से 56 फीसदी माता-पिता ने कहा कि उनके बच्चे हर दिन 1 घंटे से भी कम समय बाहर खेलने में बिताते हैं।10 में से 1 बच्चा कभी बाहर नहीं खेला है। इनमें से दो-तिहाई माता-पिता ने बताया कि उनके बच्चों ने उनके बचपन की तुलना में कम खेला।5वीं कक्षा के 26 फीसदी छात्र खेलों में कम समय बिताते हैं जबकि 12वीं कक्षा तक पहुंचते-पहुंचते यह आंकड़ा 68 फीसदी तक पहुंच जाता है. यानी जैसे-जैसे क्लास आगे बढ़ती है बच्चे खेल से दूर होते जाते हैं।

 

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