एक खजाना ऐसा भी है जो सोने से जादा कीमती है

पुष्पा द राइस इस फ़िल्म की चर्चा चारों तरफ हो रही है यह फ़िल्म हिंदी सहित सभी भाषाओं में ओटीटी प्लेटफॉर्म के जरिए रिलीज हुई है इस फ़िल्म में साउथ के सुपरस्टार और राम चरण के भाई अल्लु अर्जुन और उनके साथ रश्मिका मंदाना है। ये फ़िल्म कामयाबी के नए पैमाने स्थापित करती जा रही है। अल्लु अर्जुन एक मजदूर का पात्र रहे हैं जिसका नाम पुष्पा है। पुष्पा एक खास किस्म कीलकड़ी की तस्करी करता है और उस लकड़ी को भेज भेज कर किस प्रकार वो एक मजदूर से राजा बन जाता है ये फ़िल्म उसके बारे में है।


क्या है ये खास किस्म की लकड़ी
रक्तचंदन एक खास किस्म की लकड़ी होती है। पुष्पा फ़िल्म भले ही काल्पनिक है लेकिन रक्तचंदन के बारे में जो भी बात बोली गई है ये जो भी दिखाया है वो सब सच है। रक्त चंदन को लाल सोना भी कहते हैं यह खाली एक पेड़ नहीं है बल्कि भारत में पाई जाने वाली प्रकृति का एक बहुमूल्य खजाना भी है। इसे लाल सोना तो कहते हैं लेकिन ये लकड़ी सोने की तरह चमकती नहीं है लेकिन यह लकड़ी सोने जैसी कीमती है। परन्तु आज के समय में इंसान अपने पैसे की भूख मिटाने के लिए इसकी इतनी कड़ी सुरक्षा के बावजूद तस्करी करता है।


खुशबू नहीं आती फिर भी क्यों है ये इतनी कीमती
चंदन का प्रयोग धूप बत्ती अगरबत्ती तिलक बनाने के प्रयोग में आती है। चंदन के भी कई प्रकार हैं जैसे कि सफेद लाल और पीली। लेकिन इन सब में सबसे अलग रक्तचंदन है क्योंकि ये देखने में लाल होती है। रक्त चंदन अन्य दूसरी तरह की चंदन से अलग है क्योंकि इसमें चंदन की खुशबू नहीं आती जबकि अन्य चंदन में से खुशबू आती है लेकिन खुशबु ना आने के बाद भी रक्त चंदन अन्य चंदन के हिसाब से काफी ज्यादा कीमती है।


ये लकड़ियां किस काम में आती है
रक्तचंदन को लाल चंदन भी कहते है। इस चंदन को आयुर्वेदिक औषधियों के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता है। महंगी लकड़ी होने की वजह से इसका इस्तेमाल फर्नीचर बनाने सजावट के सामान के अलावा और भी कई चीजों में किया जाता है। जिसकी वजह से रक्त चंदन की मांग पूरी दुनिया में है। इस लकड़ी का प्रयोग शराब और कॉस्मेटिक का सामान बनाने में किया जाता है।


रक्त चंदन कहा उगती है
ये लकड़ियां तमिल नाडु और आंध्र प्रदेश की सीमा पर चार जिले जिनका नाम नेल्लोर कुरनूल चित्तूर और कडप्पा में फैली शेषाचलम की पहाड़ियों में ही पायी जाती है इसके अलावा ये लकड़ी पूरी दुनिया में कहीं नहीं पाई जातीं। इसके पेड़ की ऊँचाई 8 से लेकर 12 मीटर की ऊँचाई होती है।


कौन करता है इस बेशकीमती खजाने की रक्षा
एसटीएफ एक ऐसा सुरक्षा बल है जो कि पूर्णतः इस लकड़ी की तस्करी को रोकने के लिए बनाई गया है। इंटरनेशनल मार्केट में इस लकड़ी का दाम करोड़ों रुपये है इसी वजह से इस लकड़ी की तस्करी भी खूब होती है चीन ऑस्ट्रेलिया सिंगापुर जैसे कई सारे ऐसे बड़े देश हैं जिनमे इस लकड़ी की भरपूर मांग है। इन लकड़ियों की सबसे ज्यादा तस्करी चीन में होती है। इस लकड़ी की मदद से चीन में लोग इसका फर्नीचर सजावट का सामान और बहुत सारी चीजें बनाते हैं।

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