छोटे से गांव की नीतू रावत फलक पर कर रही उत्तराखंड का नाम रोशन, लेफ्टिनेंट कर्नल बन कर रही देश सेवा

उत्तराखंड में न प्रतिभा की कमी है और न ही हौसलों की। प्रदेश के बेटे हो या बेटियां प्रदेश को गौरवान्वित कर रहे हैं। इसी कड़ी में पौड़ी की नीतू रावत का नाम जुड़ गया है। नीतू ने साबित कर दिया है कि हौसलों में उड़ान हो तो हर मुकाम हासिल किया जा सकता है। पौड़ी जिले के थलीसैंण ब्लाक स्थित जल्लू गांव की नीतू रावत सेना में लेफ्टिनेंट कर्नल बन गई हैं। वह वर्तमान में आर्मी अस्पताल कोलकाता में सेवारत हैं। बेटी की इस उपलब्धि से गांव, क्षेत्र, जिला व प्रदेशभर में खुशी की लहर है।

आपको बता दें कि छोटे से गांव की नीतू का लेफ्टिनेंट बनने का सफर आसान नहीं था। लेफ्टिनेंट कर्नल नीतू को देश सेवा की प्रेरणा सेना से सूबेदार पिता गोविंद सिंह रावत (सेवानिवृत्त) से मिली। नीतू का जन्म 25 मई 1979 में जालंधर में हुआ था। उन्होंने केंद्रीय विद्यालय जालंधर से इंटरमीडिएट की परीक्षा उत्तीर्ण की। इसके बाद परिवार सैनिक कालोनी बालावाला देहरादून शिफ्ट हो गया। जहां डीएवी से नीतू ने बीएससी नर्सिंग किया। वर्ष 2002 में सेना में भर्ती होने के बाद उन्होंने कमांड हॉस्पिटल बंगलूरू में चार वर्षीय प्रशिक्षण लिया, जिसके बाद वह सेना के मेडिकल कोर में नर्सिंग ऑफिसर के रूप में सेवाएं देते हुए लेफ्टिनेंट बनीं। नीतू ने बच्चों की हार्ड सर्जरी का विशेष कोर्स भी सेना में रहते हुए किया है।

नीतू अहमदाबाद, रांची, रामगढ़, आरआर दिल्ली में सेवाएं दे चुकी हैं। वर्तमान में वह आर्मी अस्पताल कोलकाला में सेवारत हैं। नीतू की माता राजी देवी गृहणी हैं। छोटा भाई किशोर रावत पत्रकारिता कर रहा है। पिता सेवानिवृत्त सूबेदार गोविंद सिंह रावत ने कहा कि बेटी की इस उपलब्धि से पूरा परिवार गौरवान्वित है। नीतू ने राष्ट्रीय फलक पर उत्तराखंड का मान बढ़ाया है।

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