जज्बे को सलामः लोग लंगड़ा कहकर चिढाते थे आज मेहनत के दम पर दुनिया में बनाई पहचान, मजदूरी कर मां ने दिलाया था बैडमिंटन अब ओलंपिक मे खेलने को तैयार - Shubh Network

जज्बे को सलामः लोग लंगड़ा कहकर चिढाते थे आज मेहनत के दम पर दुनिया में बनाई पहचान, मजदूरी कर मां ने दिलाया था बैडमिंटन अब ओलंपिक मे खेलने को तैयार

कहते है हिम्मत और जज्बे से हर मुकाम हासिल किया जा सकता है। जिसे लोग पांव में कमजोरी के चलते उन्हें कई बार लोग लंगड़ा कहकर भी चिढ़ाते थे। आज वही मनोज सरकार दुनिया में अपनी पहचान बना देश और प्रदेश का नाम रोशन कर रहा है। रुद्रपुर तराई जिला मुख्यालय में गरीब परिवार में जन्मे मनोज सरकार टोक्यो ओलंपिक में टिकट पक्का होने के बाद से राष्ट्रीय फलक पर छाए हुए हैं। लेकिन मनोज सरकार का टोक्यो ओलंपिक का टिकट बेहद संघर्ष भरा रहा है।

आपको बता दें कि बचपन में ओवरडोज दवा लेने से मनोज के एक पैर ने काम करना बंद कर दिया था। घर की आर्थिक स्थिति ठीक ना होने के कारण उनका अच्छे डॉक्टर से इलाज नहीं हो पाया। लेकिन उन्होंने अपनी कमजोरी को अपनी हिम्मत बनाया। उन्हे  बचपन से ही होने बैडमिंटन खेलने का शौक था। तो उनकी मां जमुना सरकार ने मजदूरी से जुड़े रुपयों से उनको बैडमिंटन खरीद कर दिया था। वह पहले अपनी उम्र के बच्चों के साथ खेला करते थे। लेकिन उनकी शक्ल टूटने पर बच्चे उन्हें अपने साथ खेले नहीं देते थे।उन्हे लंगड़ा कहकर चिढ़ाते थे। जिससे परेशान होकर हमने बैडमिंटन खेलने का विचार छोड़ दिया था।लेकिन फिर उनके परिवार ने उनकी हिम्मत बांधी।

 बता दें कि आर्थिक तंगी के चलते मनोज ने बचपन में साइकिल में पंचर जोड़ने, खेतों में दिहाड़ी पर मटर तोड़ने और घरों में पीओपी के काम किया।मनोज वर्ष 2009 मैं हाईस्कूल के दौरान ट्यूशन के बाद दिन का खाना ना खा कर प्रैक्टिस के लिए चले जाया करते थे।लेकिन आर्थिक तंगी के कारण ही उन्होंने फिटिंग में बैडमिंटन की वॉल प्रैक्टिस देखने के बाद उन्होंने अपने घर पर ही अभ्यास शुरू किया था। होनहार खिलाड़ी को वर्ष 2012 में फ्रांस में हुई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में चंदे से जुटाए कृतियों से प्रतिभाग करना पड़ा था। अभी तक वह 33 देशों में अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता में खेल चुके हैं। जबकि 47 मेडल अर्जित किए हैं। उन्हें पूरी आशा है कि ओलंपिक में वह अपने देश के लिए गोल्ड मेडल लाने की पूरी कोशिश करेंगे।

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