पुश्तैनी और समृद्ध विरासत को संजो रहे उत्तराकाशी के दो भाई, मल्टीनेशनल कंपनी की नौकरी छोड़ शुरू किया उद्योग - Shubh Network

पुश्तैनी और समृद्ध विरासत को संजो रहे उत्तराकाशी के दो भाई, मल्टीनेशनल कंपनी की नौकरी छोड़ शुरू किया उद्योग

उत्तराखंड की संस्कृति जहां एक और खत्म हो रही है। गांव खाली हो रहे है। लोग पलायन कर रहे है,लेकिन वहीं कुछ युवा ऐसे भी है जो शहरो की अच्छी खासी जिंदगी छोड़ अपनी संस्कृति को संजोने में लगे है। इन्ही युवाओं में उत्तरकाशी के वीरपुर के दो भाईयों का नाम शामिल है। दोनों भाई आज न सिर्फ अपनी पुश्तैनी और समृद्ध विरासत को संजो रहे है बल्कि कई लोगों को रोजगार भी दे रहे है।

आपको बता दें कि पहाड़ों में भेड़ पालन से ऊन का व्यापार और उद्योग करने वाले लोगों का समाज में विशेष स्थान होता था। लेकिन  मशीनों से कृत्रिम ऊन बनने से ये ऊन अब कोई नहीं बनाता है। ये काम सिर्फ बुजुर्गों तक सीमित हो गया लेकिन इस काम को वीरपुर (डुंडा) गांव में किन्नौरी समुदाय के दो भाई मनोज और विनोद ने अपनाया । मनोज ने मल्टीनेशनल कंपनी की नौकरी छोड़ कर अपने पुश्तैनी ऊन उद्योग को ही रोजगार बनाने की ठानी। उसके बाद उन्होंने अपने छोटे भाई विनोद को भी इस कार्य के लिए प्रेरित किया।

मनोज ने ग्राफिक डिजाइनर का काम छोड़ अपने छोटे भाई के साथ मिलकर 2019 में हथकरघा मशीन एवं चरखे की मदद से ऊन सहित कंडाली (बिच्छू घास) और लिनेन के कपड़े बनाना शुरू किया है। हथकरघा और चरखे के माध्यम से ऊन के साथ ही कंडाली (बिच्छू घास) और लिनेन के कपड़े तैयार कर रहे हैं। जिसके बाद उन्होंने इसके लिए सबसे पहले बाजार तैयार करना का काम किया  और आज ये दोनो दो भाई मनोज कुमार नेगी और विनोद कुमार नेगी अपने पुश्तैनी ऊन उद्योग को पारंपरिक हथकरघा और चरखे के साथ आगे बढ़ाते हुए कपड़ा तैयार कर जापान भेज रहे हैं। इस काम में गांव की महिलाएम भी जुड़ गई है।

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