उत्तराखंड बनाम नीति आयोगः महज तीन हफ्ते में सेक्स रेश्यों में ‘फिसड्डी’ से ‘बेस्ट राज्य’ बना उत्तराखंड,

देवभूमि उत्तराखंड में बाल लिंगानुपात को लेकर नए नए आंकड़े सामने आ रहे है। उत्तराखंड बनाम नीति आयोग के बीच रस्साकशी  चल रही है। ऐसे में राज्य में सेक्स रेशो को महज तीन हफ्ते के अंदर तीसरे आंकड़े सामने आए है। जिसके अनुसार उत्तराखंड सबसे फिसड्डी से बेस्ट राज्य बन गया है।

बता दें कि हाल ही में नीति आयोग ने एसडीजी इंडेक्स जारी करते हुए सेक्स रेशो के मामले में केरल को सबसे बेहतर और उत्तराखंड को सबसे फिसड्डी राज्य बताया था। आंकड़ों के अनुसार उत्तराखंड में 840 का रेशो था। उत्तराखंड की सरकार ने इस रिपोर्ट का विरोध करते हुए आंकड़े को गलत कहा और सही आंकड़ा 949 बताया था  अब सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम के डेटा में कहा गया है कि राज्य में सेक्स रेशो 960 है यानी यह केरल से भी ज़्यादा है। सीआरएस के इस आंकड़े ने सबको हैरान कर दिया है।

उत्तराखंड में ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में सेक्स रेशो में बहुत अंतर देखने को मिलता है। 2015-16 में राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे में बताया गया था कि उत्तराखंड के शहरी क्षेत्रों में शिशु सेक्स रेशो 858 था, तो ग्रामीण क्षेत्रों में 948। अब आंकड़ो से बड़ा सवाल सामने आ रहे है। आखिर नीति आयोग, उत्तराखंड सरकार और अब सीआरएस डेटा के नंबरों में इतना फर्क कैसे पैदा हो गया? नीति आयोग का एसडीजी इंडेक्स केंद्रीय सांख्यिकी मंत्रालय से तैयार किया जाता है, जो ​संबंधित मंत्रालयों से मिले ताज़ा डेटा पर आधारित होता है।

गौरतलब है कि देश के कई ऐसे राज्य हैं जहां पहले लिंगानुपात कम था लेकिन अब उन्होंने सुधार किया है. पंजाब और हरियाणा में साल 2005 से 2006 के दौरान जन्म के समय लिंगानुपात 734 और 762 था, लेकिन 2015-16 में सुधार के साथ ये बढ़कर 860 और 836 हो गया.

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