गढ़वाल विवि और IITM शोध का खुलासा, बारिश के साथ उत्तराखंड में बरस रहा जहर, नदियां हुई जहरीली

उत्तराखंड कभी आध्यतम और शुद्ध वातावरण के लिए जाना जाता है। यहां देव ऋषिमुनि साधना करते थे। लोग सुकून के लिए यहां आते है लेकिन यहां की आबोहवा प्रदुषित  होती जा रही है। लॉकडाउन में भले ही प्रदूषण में कुछ कमी आई है लेकिन  इन सबके बीच एक वैज्ञानिकों ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। पहाड़ों में हो रही बारिश से नदियां प्रदूषित हो रही है। बारिश का पानी जहरीली बताया जा रहा है।गढ़वाल विवि और आईआईटीएम के शोध ने इस चिंताजनक रिपोर्ट का खुलासा किया है।

 हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय श्रीनगर और भारतीय उष्ण कटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान  के प्रारंभिक शोध के नतीजों में अलकनंदा घाटी में बारिश के पानी में हानिकारक रासायनिक तत्वों का पता चला है। बारिश के पानी में कैल्शियम, सल्फेट और नाइट्रेट जैसे हानिकारक रासायनिक तत्व मिले हैं, जो सीधे नदी-नालों के पानी को दूषित कर रहे हैं। इन अम्लों से हिमालयी क्षेत्रों का नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र प्रभावित हो रहा है।

अध्ययन में पता चला कि बारिश के पानी में पीएच की मात्रा 5.1 से 6.2 मिली। जो बताता है कि बारिश का पानी अम्लीय है।जबकि अम्लीय प्रवृत्ति के सल्फेट और नाइट्रेट का सांद्रण 40 से 60 प्रतिशत मिला है। जो पहाड़ों के पानी के लिए बेहद घातक है।  बारिश होने पर यह हानिकारक तत्व नदी और नालों के पानी के साथ मिल रहे है। जो मानव स्वास्थ्य एवं पारिस्थितिकी तंत्र पर बुरा प्रभाव डालते हैं। इनकी वृद्धि पेड़-पौधों, जलीय जीव-जंतुओं और वनस्पतियों के लिए हानिकारक है।

वहीं, मनुष्यों में ये चर्म रोग की उत्पत्ति कर सकते हैं। पुराने वाहनों को चलाने और कचरा जलाने से जो हानिकारक धुआं निकलता है, वह वायु की गुणवत्ता पर बुरा असर डालता है। जब बारिश होती है तो यह हानिकारक तत्व पानी में मिल जाते हैं।

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