उत्तराखंड की सृष्टि लखेड़ा की फिल्म "एक था गांव" को मिला ऑडियंस च्वाइस अवॉर्ड, पलायन की कहानी लोगो को झकजोड़ा - Shubh Network

उत्तराखंड की सृष्टि लखेड़ा की फिल्म “एक था गांव” को मिला ऑडियंस च्वाइस अवॉर्ड, पलायन की कहानी लोगो को झकजोड़ा

उत्तराखंड में पलायन एक गंभीर समस्या है गांव खाली हो रहे है। खाली होते गांव की कसक सबके दिलों में है। पहाड़ की इस कसक पर टिहरी के सेमला गांव की सृष्टि लखेड़ा ने “एक था गांव (वन्स अपॉन ए विलेज)” फिल्म बनाई है। सृष्टि की इस फिल्म को न सिर्फ भारत बल्कि दक्षिण कोरिया में भी पसंद किया जा रहा है। फिल्म की कहानी लोगों को भा गई है। इस फिल्म को सियोल ईको फिल्म फेस्टिवल (दक्षिण कोरिया) में ऑडियशंस च्वाइस अवॉर्ड मिला है। साथ ही सृष्टि को ट्रॉफी और नकद पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया है।

बता दें कि मूल रूप से विकास खंड कीर्तिनगर के सेमला गांव की रहने वाली सृष्टि 10 साल से फिल्म इंडस्ट्री में कार्यरत है। सृष्टि ने उत्तराखंड में बढ़ती पलायन की समस्या और लगातार खाली हो रहे गांवों को देखते हुए इसका कारण ढूंढने  की सोची। जिसके लिए उन्होंने पावती शिवापालन के साथ (सह निर्माता) एक था गांव फिल्म बनाई। फिल्म के लिए उन्होंने पलायन से लगभग खाली हो चुके अपने गांव का चयन किया। फिल्म की कहानी  मजबूरी में गांव छोड़ चुके लोगों की कहानी पर आधारित है। फिल्म में दर्शाया गया है कि गांव से जाने के बाद भी लोगों के मन में किस तरह वापस लौटने की कशमकश चलती रहती है।

फिल्म के माध्यम से बताया गया कि अपनी जन्मभूमि को छोड़ने का कोई न कोई कारण होता है लेकिन गांव छोड़ने के बाद भी लोगों के मन में गांव लौटने की कशमकश चलती रहती है। फिल्म को कोरियाई भाषा के सब टाइटल के साथ प्रदर्शित किया गया। दर्शकों ने फिल्म की थीम, बैकग्राउंड और अभिनय को सराहते हुए पहला नंबर दिया है। फिल्म ने ऑडियशंस च्वाइस अवाॅर्ड जीता।

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