इस नौजवान ने केदारनाथ घाटी में ढूंढ निकली बेहद खूबसूरत झील जहां होता है स्वर्ग से भी सुंदर एहसास - Shubh Network

इस नौजवान ने केदारनाथ घाटी में ढूंढ निकली बेहद खूबसूरत झील जहां होता है स्वर्ग से भी सुंदर एहसास

उत्तराखंड जिसे पर्यटन के क्षेत्र के हिसाब से काफी महत्वपूर्ण माना जाता है पारम्परिक हिन्दू ग्रन्थों और प्राचीन साहित्य में उत्तराखण्ड उल्लेख देखने को मिलता है। हिन्दी और संस्कृत में उत्तराखण्ड का अर्थ उत्तरी क्षेत्र या भाग होता है। राज्य में हिन्दू धर्म की पवित्रतम और भारत की सबसे बड़ी नदियों गंगा और यमुना के उद्गम स्थल क्रमशः गंगोत्री और यमुनोत्री तथा इनके तटों पर बसे वैदिक संस्कृति के कई महत्त्वपूर्ण तीर्थस्थान हैं। इस लिए इसे देवभूमि के नाम से जाना जाता है।


केदारनाथ से 16 किमी ऊपर दूध गंगा घाटी में हिमालय की तलहटी पर साफ पानी से लबालब पैया ताल आज भी पर्यटकों की नजरों से ओझल है। ताल में पड़ रही मेरू-सुमेरू पर्वत श्रृंखला की छाया इसकी खूबसूरती को और भी बड़ा रही है। एक पखवाड़ा पूर्व जिले के दो युवक पहली बार यहां पहुंचे हैं। इससे पहले गरूड़चट्टी में रह रहे बाबा ही ताल तक पहुंचे थे।
पर्वत, जल धाराओं और कुंडों की पावन भूमि केदारनाथ से वासुकीताल होते हुए पैया ताल पहुंचा जाता है। भू-वैज्ञानिकों ने भी इस ताल को नया बताया है। एक पखवाड़ा पूर्व जिले के दो युवक संदीप कोहली और तनुज रावत अपने दो साथियों के साथ केदारनाथ गए थे। वहां से ये लोग वासुकीताल पहुंचे, जहां उन्हें बलराम दास मिले। जो वहां एक गुफा में साधना कर रहे थे। बाबा ने युवाओं को जानकारी दी कि दूध गंगा घाटी में एक भव्य ताल है, जिसके बारे में किसी को कोई जानकारी नहीं है। लगभग तीन वर्ष पूर्व वे पहली बार पैंया ताल गए थे। इसके बाद संदीप व तनुज वासुकीताल से 7 किमी. दूरी तय कर लगभग दो घंटे में पैया ताल पहुंचे।


ताल के चारों तरफ व रास्ते में ब्रह्मकमल, फेन कमल व अन्य कई प्रजाति के फूल खिले हुए थे। इधर, केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग के डीएफओ अमित कवर ने बताया कि पैंया ताल के बारे में जानकारी नहीं हैं। जल्द ही ताल का भ्रमण कर पूरी जानकारी जुटाई जाएगी।
गूगल मैप में पैंया ताल नाम से केदारनाथ क्षेत्र में कोई ताल नहीं दिख रहा है, लेकिन चित्रों में जो ताल दिखाई दे रहा है वह केदारनाथ के ऊपर दूध गंगा घाटी में स्थित लग रहा है। जो समुद्रतल से लगभग साढ़े चार से पांच हजार मीटर की ऊंचाई पर है। यह मजबूत ताल है और इसमें पिघली बर्फ का पानी है, जो साफ है।
– डा. डीपी डोभाल, भू-वैज्ञानिक वाडिया संस्थान, देहरादून

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