गढ़वाल के इन नौजवानों का नहीं डगमगाया मन ₹52000 रूपया पहुंचाए असली मालिक तक

उत्तराखंड के माटी में कुछ तो खास है जिससे यह दुनियाभर में देवभूमि की अलग छवि कायम करती है. एक और जहां देव छावों में पले बड़े उत्तराखंड के सपूतों ने देश विदेश में सर्वोच्च पदों का नेतृत्व कर देवभूमि का गौरव बढ़ाया है तो वहीं अपनी सादगी, सच्चाई और ईमानदारी से यहां के लोगों ने करोड़ों दिलों में अपनी जगह बना कर हमेशा ही मानवता की मिसाल पेश की है.


दरअसल 14 सितम्बर को राजस्थान के अलवर निवासी राजन शर्मा केदारनाथ की यात्रा पर आए हुए थे. मगर इस दौरान उनकी हीरा जड़ित 25 लाख की अंगूठी कही खो गई. जब तक उन्हें इस बात का पता चला कि अंगूठी उनके हाथों से निकल कर कहीं गिर गई है तब तक काफी देर हो चुकी थी. हालांकि उन्होंने काफी खोजबीन भी की मगर सफलता हाथ नहीं लगी. निराश होकर राजन ने सोनप्रयाग थाने में शिकायत दर्ज करवाई और वापस अपने राज्य चले गए.
मगर बाबा केदार के द्वार से कोई निराश कैसे लौट सकता था. बीते 16 Sep को रुद्रप्रयाग जिले के न्यालसू निवासी राकेश रावत ने यह अंगूठी पाई. वो चाहते तो बिना किसी को बताए इसे अपने पास रख सकते थे मगर नहीं उन्होंने इस कीमती अंगूठी को उसके असली हकदार तक पहुंचाने की ठानी.
उत्तराखंड के मान को ध्यान में रखते हुए और अपनी ईमानदारी का परिचय देते हुए राकेश ने इस बात की जानकारी पुलिस को दी. उन्होंने बताया कि उन्हें यह अंगूठी उदककुंड के पास से मिली थी. जिसके बाद पुलिस ने राजन शर्मा को फोन कर सोनप्रयाग बुलाया और अंगूठी उन्हें सौंप दी. हर कोई इस युवा की ईमानदारी से बहुत प्रभावित हुआ सभी लोगों ने उनके इस मानवीय गुण की सराहना की. राजन शर्मा ने राकेश की ईमानदारी को तह दिल से सलाम किया और धन्यवाद स्वरूप उन्हें 25 हजार का इनाम दिया. राकेश ने पहले तो इसे स्वीकार करने से मना किया क्योंकि उनका कहना था कि “मैंने तो बस अपनी जिम्मेदारी समझी और अंगूठी को असल मालिक के सुपुर्द की है हर किसी को लोक लालच से परे अपने मानवीय गुणों का परिचय देना चाहिए”. मगर फिर बहुत समझाने के बाद उन्होंने इनाम की राशि स्वीकार की.
पैसों की मारा-मारी के इस दौर में जहां कोड़ी कोड़ी के लिए बड़े से बड़े अपराधिक घटनाओं को अंजाम दिया जा रहा है वहीं देवभूमि के राकेश रावत ने हर प्रकार के मोह को दरकिनार कर ईमानदारी की जो मिसाल पेश कर इस देवधरा का सम्मान बढ़ाया है।

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